रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांगों को लेकर रांची में वामपंथी छात्र व युवा संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) और उससे संबद्ध संगठनों के 'विधानसभा मार्च' के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर अमरनाथ पांडेय नामक युवक ने स्याही फेंक दी।
घटना के तुरंत बाद मौके पर तैनात पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया, जिससे पूछताछ की जा रही है।
हजारों युवाओं और छात्र संगठनों की एकजुटता
आइसा के नेतृत्व में आयोजित इस विधानसभा घेराव मार्च की शुरुआत जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और आसपास के क्षेत्रों से हुई। इसमें हजारों अभ्यर्थियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हाथों में बैनर, पोस्टर और तिरंगा थामे प्रदर्शनकारी "भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर रोक लगाओ" के नारे लगा रहे थे। इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के साथ-साथ स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया,ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं: नेहा बोरा
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद नेहा बोरा विशेष रूप से झारखंड के अभ्यर्थियों के समर्थन में रांची पहुंची थीं। मार्च से पहले उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन स्थल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने टेंट में मौजूद छात्रों और आमरण अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं।
विधानसभा घेराव के दौरान नेहा बोरा ने कहा कि परीक्षाओं में लगातार हो रही गड़बड़ियां सीधे तौर पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और पुनर्परीक्षा की मांग को लेकर जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, यह लड़ाई जारी रहेगी।
वहीं, आंदोलनकारी छात्रों ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन और अनिश्चितकालीन आमरण अनशन जारी रहेगा।
घटना के बाद भाकपा-माले विधायक के आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेहा वोरा ने केंद्र सरकार, भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केंद्र के इशारे पर छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए यह हमला कराया गया है? नेहा वोरा ने कहा कि ऐसे प्रयासों से छात्र-युवा आंदोलन डरने या दबने वाला नहीं है, बल्कि और मजबूत होगा। नेहा वोरा ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन को दबाने के लिए भाजपा और आरएसएस परोक्ष राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब छात्र-युवा आंदोलन के दौरान हमने आंसू गैस और पैलेट गन का सामना किया है, तो स्याही फेंकने जैसी घटनाओं से आंदोलन को रोका नहीं जा सकता। छात्र आंदोलन इस नफरत की राजनीति का डटकर जवाब देगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने तीन प्रमुख मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द कर नया परीक्षा शेड्यूल जारी किया जाए, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को जांच के दायरे में लाया जाए और शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निजी कंपनियों के बजाय सरकारी संस्थाओं को सौंपी जाए।
नेहा वोरा को मंच से उतारा
रांची। आइसा की अध्यक्ष नेहा वोरा शुक्रवार को जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंची। वह मंच पर गयीं तो वहां उपस्थित आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें मंच से नीचे उतार दिया। छात्रों ने पहले ही कहा था कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल का सीधा हस्तक्षेप नहीं चाहिए। वो अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, इसमें किसी भी राजनीतिक दल को माइलेज लेने नहीं दिया जायेगा। जब आइसा के सदस्यों की ओर से विरोध किया गया तो, नेहा वोरा समेत उन्हें मंच से जबरतस्ती उतार दिया गया।
