​रांची। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार पिछले तीन हफ्तों से जारी छात्र आंदोलन से जनता का ध्यान भटकाने में जुटी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की ज्वलंत समस्याओं का समाधान करने के बजाय राज्य सरकार खान एवं खनिज (संशोधन) विधेयक 2026 के नाम पर झूठ फैलाकर आंदोलन का बहाना ढूंढ रही है।

​सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री मरांडी ने कहा कि संसद में इंडी गठबंधन के 8 सांसद (लोकसभा में 5 और राज्यसभा में 3) मौजूद हैं। 13 अगस्त को जब इस विधेयक पर संसद में चर्चा हो रही थी, तब इन सांसदों ने भाग तक नहीं लिया। इससे साफ है कि इन्हें झारखंड के हितों से कोई सरोकार नहीं है, वे केवल हंगामेदार राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल झारखंड के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए बना है और इसमें बस इतना संशोधन किया गया है कि राज्य अब मनमर्जी से टैक्स नहीं लगा सकेंगे; बाकी सभी व्यवस्थाएं यथावत हैं।

​बाबूलाल मरांडी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2014-15 की तुलना में आज राज्यों को मिनरल्स से काफी अधिक राजस्व मिल रहा है। पहले जहां राज्यों को लगभग 60% हिस्सा रॉयल्टी के रूप में मिलता था, वहीं मोदी सरकार के दौरान यह बढ़कर 90% तक पहुंच गया है। पिछले एक दशक में जहां राज्यों को 25 हज़ार करोड़ रुपये मिले थे, वहीं 2025-26 में यह राशि बढ़कर 1 लाख 14 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

​उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ने 2024 में सेस लगाने का नियम बनाकर कोयला और आयरन ओर जैसे खनिज पदार्थों पर तीन बार दरें बढ़ाईं। इसका प्रतिकूल असर छोटे उद्यमियों के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों पर भी पड़ा है और राज्य का औद्योगिक विकास बाधित हुआ है। देश का 40% खनिज झारखंड में होने के बावजूद राज्य पिछड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले छह वर्षों में झारखंड में 4 खदानों की नीलामी तो हुई, लेकिन वे अब तक शुरू नहीं हो सकीं। इसके विपरीत गुजरात में 14, कर्नाटक में 18 और छत्तीसगढ़ में 5 खदानों में काम शुरू हो चुका है। झारखंड में खदानें चालू न होने से राज्य को रॉयल्टी और अन्य राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।