रांची। रांची नगर निगम द्वारा प्रस्तावित बोरिंग की नई नियमावली के विरोध में 'रांची बोरवेल ऑनर एंड एजेंट्स एसोसिएशन' ने मोर्चा खोल दिया है। विशालाक्षी बैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक में संघ ने आशंका जताई कि नए प्रावधानों से आम जनता, एजेंटों और गाड़ी मालिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और पानी पाने में भारी कठिनाई होगी।
एसोसिएशन के संरक्षक के.के. गुप्ता और महेश चंद्रा ने बताया कि नई नियमावली के तहत छोटे व्यास की बोरिंग के लिए भी निगम की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है, जिसके लिए 2,500 से 5,000 रुपये तक का शुल्क तय किया गया है, जो काफी अधिक है। इसके अलावा, बोरिंग की अनुमति के लिए होल्डिंग नंबर या जमीन के पूरे कागजात होना अनिवार्य किया गया है। संघ के अनुसार रांची में कई ऐसे मकान हैं जिनका होल्डिंग नंबर नहीं है, ऐसे में उन्हें पानी जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रखना अव्यवहारिक है।
इन प्रावधानों को संशोधित कराने के लिए एसोसिएशन जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, संबंधित मंत्रियों और रांची मेयर से मिलकर अपनी मांगें रखेगा। साथ ही, अगले सप्ताह प्रभावित नागरिकों के साथ एक बैठक करने का भी निर्णय लिया गया है।
