रांची। जेएसएससी-सीजीएल चयनित अभ्यर्थियों ने उन खबरों पर आपत्ति जतायी है जिनमें उनके ऊपर 30-40 लाख रुपये की डील कर नौकरी पाने का आरोप लगाया जा रहा है। बिना किसी विधिक प्रामाणिकता, आधिकारिक वित्तीय जांच रिपोर्ट या फोरेंसिक साक्ष्य के सभी चयनित अभ्यर्थियों के बारे में सामूहिक लांछन लगाने को अन्याय भी बताया है। उन्होंने सरकार के स्तर से जारी जांच को निष्पक्ष बनाये रखने की अपील करते विधिक प्रक्रियाओं पर भी भरोसा जताया है। सीजीएल चयनित अभ्यर्थी मंच की ओर से जयदीप ने प्रेस क्लब में नियुक्ति के लिए पैसों की लेन-देन की खबरों से इंकार किया। जयदीप ने बताया कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में लगभग 650 आदिवासी और दिव्यांग भाई-बहन भी चयनित हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन लाचार बच्चों के पास 35-40 लाख रुपयों की बोलियां लगाने का सामर्थ्य था। चयनित अभ्यर्थी मंच के अनुसार, इस परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों में एक बड़ी संख्या (लगभग 600) ऐसे युवाओं की है जो पहले से देश के अलग-अलग हिस्सों में, सरकारी या निजी क्षेत्रों में सम्मानजनक नौकरियों पर कार्य कर रहे थे। आज इस अचानक आए संकट के कारण वे युवा बीच चौराहे पर खड़े हैं। चंदन कुमार ने मौके पर कहा कि चयनित अभ्यर्थी इस पूरे मामले में किसी भी स्तर की जांच के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं। एक जिम्मेदार लोक सेवक के रूप में, वे राज्य सरकार, प्रशासन और विधिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखते हैं। अभ्यर्थियों का स्पष्ट और सैद्धांतिक स्टैंड है कि सरकार चाहे जिस भी स्वतंत्र एजेंसी से इस पूरे मामले की जांच करवाए, वे उसका पूरी तरह स्वागत और समर्थन करते हैं। जांच के बाद जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानूनी रूप से कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। लेकिन चंद दोषियों के कारण पूरी परीक्षा को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है।