रांची। झारखंड में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-2026 के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है। रांची जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में 6,44,071 मतदाताओं को जिला प्रशासन द्वारा नोटिस थमाया गया है, जिससे अपनी नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए लोग अंचल कार्यालयों से लेकर समाहरणालय तक चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जारी आंकड़ों के अनुसार रांची में 2,08,801 मतदाताओं को मैपिंग न होने और 4,35,270 वोटरों को नाम, उम्र व परिवार से विवरण मेल न खाने के कारण नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं पूरे राज्य में करीब 63 लाख से अधिक मतदाता संदेह के घेरे में हैं, जिनमें अकेले तार्किक विसंगति श्रेणी के 45,55,227 वोटर शामिल हैं।
प्रशासन द्वारा नोटिस मिलने के बाद प्रभावित मतदाता तय तारीख पर पहचान और पते का दस्तावेज जमा करने के लिए लंबी कतारों में लगे हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने ऑफलाइन प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था शुरू की है। हालांकि, कई वोटरों का आरोप है कि मैपिंग अभियान के दौरान 2003 के मतदाता सूची से जुड़े अपने और परिवार के सभी दस्तावेज जमा कराने के बावजूद उन्हें दोबारा नोटिस दिया गया है।
इस प्रक्रिया में कुछ व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं।
शादी से पहले 'कुमारी' और शादी के बाद 'देवी' टाइटल होने के कारण बड़ी संख्या में विवाहित महिलाओं के नाम 2003 की मतदाता सूची से मैच नहीं कर रहे हैं, जिससे उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं।
हिंदी नामों में अनुस्वार न होने या अंग्रेजी-हिंदी स्पेलिंग में अंतर होने के कारण भी तार्किक विसंगति दर्शा कर लोगों को कलेक्ट्रेट बुलाया जा रहा है।
अचानक नोटिस मिलने से मतदाताओं में बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। दूसरी ओर, बीएलओ का कहना है कि 2003 की सूची से डेटा मैच न होने के कारण चुनाव आयोग के निर्देशानुसार नोटिस जारी हो रहे हैं।
मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 'नो-मैप' या 'तार्किक विसंगति' की श्रेणी में आने वाले मतदाताओं की ईआरओ स्तर पर नियमानुसार सुनवाई चल रही है। नोटिस प्राप्त मतदाताओं द्वारा जमा किए गए आवश्यक दस्तावेजों और तथ्यों की समीक्षा के बाद ही ईआरओ स्तर पर सकारण आदेश पारित किया जाएगा।
