​रांची। दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए रांची जिला प्रशासन ने पूजा समितियों और आयोजकों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा और सभी समितियों को पुलिस-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा।

​ पंडाल और मुख्य द्वार का निर्माण रिहाइशी मकानों, गैस गोदाम, ट्रांसफॉर्मर, बिजली के तारों और रेलवे लाइन से सुरक्षित दूरी पर ही किया जाएगा। ज्वलनशील या सिंथेटिक कपड़ों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा और पंडाल की मजबूती का प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य होगा।

पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रवेश व निकास द्वार होंगे। आपातकालीन निकासी की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। सड़क पर दुकानों के कारण यातायात बाधित न हो, इसके लिए मेला व खाद्य दुकानों को पंडाल से सुरक्षित दूरी पर लगाने का निर्देश दिया गया है।

​रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। सुरक्षा के मद्देनजर पंडालों और प्रमुख रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। पंडाल के बाहर समिति के पदाधिकारियों, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं के फोन नंबर प्रदर्शित करने होंगे।

​ समितियों को पर्याप्त संख्या में आईडी कार्ड धारक स्वयंसेवक तैनात करने होंगे, जिनकी सूची स्थानीय थाने को दी जाएगी। संदिग्धों को कानून हाथ में लिए बिना पुलिस को सौंपना होगा। सोशल मीडिया या वॉट्सऐप पर भड़काऊ सामग्री या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।

​प्रतिमा विसर्जन केवल निर्धारित तारीख, समय, मार्ग और चिन्हित घाटों पर ही किया जा सकेगा। जुलूस के दौरान बड़ी गाड़ियों की छत पर लोगों के बैठने और चार मीटर से ऊंची सामग्री या झंडे लगाने पर रोक रहेगी।

​जिला प्रशासन ने सभी पूजा समितियों से इन नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके और त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।