रांची। केंद्र सरकार द्वारा संसद से पारित कराए गए 'खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम 2026' के विरोध में आज रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर वाम दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भाकपा, माकपा (सीपीएम) और भाकपा-माले के संयुक्त बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का पुतला फूंका तथा विधेयक को तुरंत वापस लेने की मांग की।

भाकपा के प्रदेश सचिव महेन्द्र पाठक ने कहा कि यह संशोधन विधेयक झारखंड के अस्तित्व और आदिवासी-मूलवासी के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यदि केंद्र सरकार 15 दिनों के भीतर इसे वापस नहीं लेती है, तो पूरे राज्य में चक्का जाम और राजभवन का घेराव किया जाएगा। राष्ट्रपति को इस विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजना चाहिए।

भाकपा-माले की राज्य सचिव अनीता भट्टाचार्य ने कहा कि यह नया कानून खनिजों के राष्ट्रीयकरण के सिद्धांत को खत्म कर देगा और खदानों को महज 2-3 बड़े कॉरपोरेट घरानों के हाथों में सौंप देगा।

सीपीएम नेता प्रफुल्ल लिंडा ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है। इस कानून से विस्थापन 10 गुना तक बढ़ जाएगा। यह सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले, पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून का सीधा उल्लंघन है।

दलित अधिकार मंच के अध्यक्ष भंते जैनेंद्र तथागत ने कहा कि राज्यों से सेस लगाने का अधिकार छीनकर केंद्र सरकार ने झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार किया है, जिससे किसान, मजदूर और युवाओं का भारी नुकसान होगा।