रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए पीड़ित अभ्यर्थी के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी सरकारी अधिकारी की प्रशासनिक गलती का खामियाजा किसी अभ्यर्थी को नहीं भुगतना पड़ सकता।

जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने जेपीएससी को याचिकाकर्ता चंचला कुमारी की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार कर उनकी नियुक्ति की अनुशंसा करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आयोग को आठ सप्ताह के भीतर आवश्यक अनुशंसा भेजने तथा राज्य सरकार को अनुशंसा प्राप्त होने के चार सप्ताह के अंदर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

चंचला कुमारी ने 7वीं से 10वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2021 के तहत वर्ग-II अधिकारी के पद के लिए अनुसूचित जाति श्रेणी में आवेदन किया था। उन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा सफलतापूर्वक पास की, जिसके बाद उन्हें इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। हालांकि, दस्तावेज सत्यापन के दौरान जेपीएससी ने उनके जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति जताते हुए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। आयोग ने उम्मीदवारी खारिज करने की वजह यह बताई कि अभ्यर्थी का 27 मार्च 2019 को जारी जाति प्रमाणपत्र पति के नाम पर आधारित था। हालांकि, चंचला कुमारी ने बाद में 9 मई 2022 को पिता के नाम से जारी नया जाति प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत किया था।

31 मई 2022 को जारी अंतिम परिणाम में चंचला कुमारी ने कुल 590 अंक हासिल किए थे, जबकि एससी श्रेणी में अंतिम चयनित उम्मीदवार का कटऑफ 583 अंक था।कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद चयन सूची से बाहर किए जाने पर उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था, जहां से अब उन्हें न्याय मिला है।