धनबाद। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध कोयला खनन, रंगदारी और धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत ईडी ने 28 जुलाई को झारखंड के धनबाद जिले में स्थित 31 परिसरों में व्यापक तलाशी और जब्ती अभियान चलाया।
ईडी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार तलाशी अभियान के दौरान ईडी के हाथ कई अहम सबूत और संपत्तियां लगी हैं। आरोपी एलबी सिंह द्वारा म्यूचुअल फंड में किए गए लगभग 160 करोड़ रुपये के निवेश पर रोक लगाते हुए उसे फ्रीज कर दिया गया है। मौके से 1.02 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई। छापेमारी के दौरान 200 से अधिक अचल संपत्तियों से जुड़ी जानकारी और दस्तावेज मिले हैं।
कई डिजिटल डिवाइस और संबंधित संस्थाओं के बही-खाते भी जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई अनिल गोयल, एलबी सिंह, हरेंद्र चौहान और अन्य से जुड़े मामलों में की गई है। गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव और माधो सिंह और उनके निदेशकों के ठिकानों पर भी छापेमारी हुई।
ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच झारखंड राज्य पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की थी। पुलिस ने धनबाद और आसपास के जिलों में अवैध कोयला खनन, कोयला चोरी, कोयले के उठाव पर अवैध लेवी/रंगदारी वसूलने और संबंधित अवैध गतिविधियों के आरोपों में ये मामले दर्ज किए थे। इनमें से कई मामलों में पुलिस पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
पीएमएलए के तहत हुई जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने इन अनुसूचित अपराधों को अंजाम देकर भारी मात्रा में 'अपराध की कमाई' अर्जित की। इस अवैध धन की पहचान छिपाने और इसे वैध दिखाने के लिए कई फर्जी व अन्य कंपनियों और व्यक्तियों के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया गया। इसके बाद इस अवैध कमाई का इस्तेमाल चल और अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
इससे पहले नवंबर 2025 में भी इस मामले से जुड़े अनिल गोयल, एलबी सिंह और अन्य व्यक्तियों/इकाइयों के ठिकानों पर ईडी की टीम ने छापेमारी की थी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई और छानबीन तेजी से जारी है।
