बोकारो। बोकारो में हृदय रोग के इलाज के क्षेत्र में एक उपलब्धि हासिल की गई है। वेलमार्क अस्पताल स्थित 'वेलमार्क हार्ट सेंटर' में डॉक्टरों की टीम ने पहली बार कैथेटर तकनीक के माध्यम से 3 सेंटीमीटर लंबे हृदय के छिद्र को बंद (ASD Device Closure) करने में सफलता प्राप्त की है। इस सफल प्रक्रिया के बाद अस्पताल परिसर में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में इस उपलब्धि की जानकारी दी गई।
यह जटिल और आधुनिक इलाज वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल कुमार और उनकी चिकित्सा टीम द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार 22 वर्षीय मरीज के दिल के ऊपरी दोनों चैंबरों के बीच लगभग 3 सेमी का बड़ा छिद्र था। इसके कारण बाएँ चैंबर से दाएँ चैंबर में असामान्य रक्त प्रवाह हो रहा था। इकोकार्डियोग्राफी जाँच में पाया गया कि मरीज के दाएँ चैंबर का आकार बढ़ गया था और वह पल्मोनरी हाइपरटेंशन से पीड़ित था, जिससे उसे लगातार साँस लेने में तकलीफ हो रही थी।
चीरा-फाड़ वाली पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी के बजाय डॉक्टरों ने जाँघ की नस के रास्ते एक विशेष कैथेटर के जरिए 'सेप्टल ऑक्लूडर डिवाइस' (छातेनुमा धातु की संरचना) को दिल के छिद्र तक पहुँचाया। फ्लोरोस्कोपी और इकोकार्डियोग्राफी की मदद से छिद्र के दोनों तरफ डिवाइस को सही ढंग से स्थापित कर दिया गया, जिससे रक्त का असामान्य प्रवाह तुरंत रुक गया और छिद्र पूरी तरह बंद हो गया।
वेलमार्क हार्ट सेंटर के डायरेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि यह तकनीक मरीजों के लिए एक वरदान की तरह है। इसमें न तो छाती काटने की जरूरत होती है और न ही मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है। ओपन हार्ट सर्जरी की तुलना में मरीज की रिकवरी बहुत तेजी से होती है।
उन्होंने आगे कहा कि बोकारो में पहली बार इस प्रकार की सफल प्रक्रिया होना स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा कदम है। अब जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित ऐसे मरीजों को इलाज के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने शहर में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
