रांची। संसद से पारित माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन विधेयक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान और रुख पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पलटवार किया है। उन्होंने हेमंत सरकार पर इस विधेयक के बहाने जनता को गुमराह करने और राजनीतिक रोटियां सेकने का आरोप लगाया। श्री साहू ने कहा कि विधेयक को लेकर विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं।
आदित्य साहू ने कहा कि यह संशोधन विधेयक खनिज क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने वाला है। इससे निवेश, उत्पादन, रोजगार, अवसंरचना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह विधेयक भूमि और खनिजों पर राज्यों के अधिकारों या उनके कर वसूलने की शक्तियों को समाप्त नहीं करता। केंद्र सरकार का उद्देश्य 'वन नेशन, वन टैक्स' की तर्ज पर नियमों में एकरूपता लाना है, ताकि सेस के नाम पर होने वाली लूट पर विराम लग सके।
राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफटी), राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट और जीएसटी की हिस्सेदारी पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाओं के बंद होने का डर दिखाकर जनता की सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है। समाधान खोजने के बजाय केंद्र से टकराव खड़ा करना राज्य के हित में नहीं है। छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए अपनी पार्टी झामुमो को आंदोलन के लिए उकसाना गैर-जिम्मेदाराना है।
साहू ने राज्य सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कुछ प्रमुख आंकड़े और तथ्य सामने रखते हुए कहा कि देश भर में 434 खनिज ब्लॉक की नीलामी हुई (ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49), जबकि खनिजों से समृद्ध झारखंड में 7 वर्षों के कार्यकाल में महज 3 खदानों की ही नीलामी हो सकी। इससे राज्य को भारी राजस्व का नुकसान हुआ।
अपने कार्यकाल में हुई खनिजों की ऐतिहासिक लूट और अवैध खनन पर लगाम लगाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है। राज्य भर में DMFT फंड के 2000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि अकेले बोकारो में ही 631 करोड़ रुपये की बंदरबांट हुई है।
या तो विधेयक का विरोध करें या दें इस्तीफाः कांग्रेस
रांची। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिन्हा ने खनिज संपदा से जुड़े मामले पर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ हमला बोलते हुए कहा है कि खनिज संपदा झारखंड की पहचान, अर्थव्यवस्था और यहां की जनता के अधिकारों से जुड़ा हुआ सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा झारखंड के हितों और राज्य के अधिकारों को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रावधान को कांग्रेस पार्टी किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा पर निशाना साधते हुए राकेश सिन्हा ने कहा कि यदि भाजपा के सांसदों में झारखंड और यहां की जनता के प्रति जरा भी नैतिकता और जिम्मेदारी बची है, तो उन्हें इस विधेयक का खुलकर विरोध करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भाजपा सांसद केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर इस विधेयक को वापस कराएं या फिर अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के साथ हक की लड़ाई में शामिल हों। राकेश सिन्हा ने कहा कि जब भी दिल्ली में झारखंड के अधिकारों और हितों की रक्षा करने की बात आती है, भाजपा के सांसदों की आवाज गायब हो जाती है।
यह मुद्दा किसी एक पार्टी से बड़ा है और सीधे तौर पर झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य व जनता के अधिकार से जुड़ा है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राज्य की जनता अब यह देखना चाहती है कि भाजपा सांसद झारखंड के हक के साथ खड़े होते हैं या फिर दिल्ली में सत्ता की मलाई खाने के लिए चुप्पी साधे रहते हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों को अब यह तय करना होगा कि उनके लिए पद और सत्ता की सुविधाएं प्राथमिकता हैं या फिर झारखंड के अधिकार और जनता का हित। यदि वे इस विधेयक से सहमत नहीं हैं, तो उन्हें संसद से लेकर सड़क तक इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए।
एमएमडीआर विधेयक झारखंड के संघीय ढांचे पर सीधा हमला: भाकपा
रांची। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), झारखंड राज्य परिषद ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में 12 अगस्त 2026 को पारित किए गए 'खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026' का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इस विधेयक को अपनी स्वीकृति न देने और इसे तुरंत वापस लौटाने की मांग की है।
पार्टी के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने एक बयान जारी कर कहा कि यह संशोधन विधेयक झारखंड के जल, जंगल, जमीन, संघीय ढांचे और आदिवासी अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है।
विधेयक के विरोध में भाकपा ने कहा है कि यह संघीय ढांचे और संविधान का उल्लंघन है।विधेयक में शामिल नई धारा 9डी के जरिए राज्यों के कर लगाने के संवैधानिक अधिकारों को छीना जा रहा है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 का सीधा उल्लंघन है।
वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि जिसकी जमीन, उसी का खनिज/खदान।केंद्र सरकार का नया विधेयक इस कानूनी सिद्धांत को निष्प्रभावी करने का प्रयास करता है।
झारखंड के कुल गैर-कर राजस्व का लगभग 84.9% हिस्सा खनन क्षेत्र से प्राप्त होता है। इस नए कानून के लागू होने से राज्य को हर साल हजारों करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
राजस्व में गिरावट के कारण राज्य में चल रही अबुआ आवास योजना, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाएं ठप हो सकती हैं, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव झारखंड की आम जनता पर पड़ेगा।
भाकपा का आरोप है कि लिथियम, सोना, चांदी, हीरा, पन्ना, पुखराज और यूरेनियम जैसे अत्यंत मूल्यवान खनिजों को निजी उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को औने-पौने दामों में सौंपने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा इस विवादित संशोधन विधेयक को तत्काल वापस लेने और पेसा कानून और संविधान की 5वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत किसी भी खनन प्रक्रिया के लिए स्थानीय ग्राम सभा की पूर्व सहमति को अनिवार्य करने की मांग की है।
