चतरा। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। पार्टी के इस चरणबद्ध आंदोलन का असर अब राज्य के प्रमुख कोयला खनन क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में चतरा जिले के टंडवा स्थित प्रसिद्ध आम्रपाली कोल प्रोजेक्ट में झामुमो कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए कोयले के उत्पादन और डिस्पैच को अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद करा दिया है।

झामुमो के इस कड़े रुख के कारण परियोजना क्षेत्र में खनन कार्यों के साथ-साथ कोयला परिवहन की गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं, जिससे खदान प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार लगातार झारखंड के खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों को कमजोर करने और उन्हें छीनने की कोशिश कर रही है।

झामुमो का कहना है कि यह महज किसी सामान्य संशोधन विधेयक का विरोध नहीं है, बल्कि यह झारखंड के अधिकारों, जन-अस्मिता और राज्य के आर्थिक स्वाभिमान की रक्षा की लड़ाई है। झारखंड के खजाने पर पहला हक यहाँ की जनता और राज्य का है।

झामुमो के जिलाध्यक्ष ने आंदोलन स्थल से केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस जनविरोधी खनिज विधेयक को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी राज्यभर में इस आंदोलन को और भी व्यापक, उग्र और निर्णायक बनाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन के प्रथम चरण में कोयला खदानों का काम ठप कराया गया है। आगे की रणनीति और आंदोलन का नया स्वरूप केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के आधार पर तय किया जाएगा। फिलहाल जब तक केंद्रीय नेतृत्व से अगला आदेश नहीं मिलता, तब तक परियोजना में ट्रांसपोर्टिंग और माइनिंग का काम ठप रहेगा।

20 को झामुमो की विस्तारित केंद्रीय समिति की बैठक

केंद्र सरकार द्वारा पारित 'खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। केंद्र सरकार की खनिज नीतियों और इस नए संशोधन विधेयक के विरोध में राज्यव्यापी जन-आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए झामुमो ने अपनी विस्तारित केंद्रीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। यह उच्चस्तरीय बैठक 20 अगस्त 2026 को रांची के सोहराय भवन में सुबह 10:30 बजे से आयोजित की जाएगी। झामुमो नेतृत्व का स्पष्ट आरोप है कि केंद्र का नया खान एवं खनिज संशोधन विधेयक झारखंड के स्वायत्त अधिकारों और आर्थिक हितों पर सीधा प्रहार करता है। पार्टी इस कानून का पहले ही कड़ा विरोध कर चुकी है, लेकिन अब इसे केवल बयानों तक सीमित न रखकर एक बड़े चरणबद्ध जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। 20 अगस्त की इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के अध्यक्षों, सचिवों, संयोजकों और महानगर पदाधिकारियों से गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। जिलास्तरीय नेताओं से मिले जमीनी सुझावों के आधार पर ही राज्यभर में धरना-प्रदर्शन, घेराव और चरणबद्ध विरोध कार्यक्रमों की रूपरेखा अंतिम रूप से तय की जाएगी। बैठक में विधेयक के विरोध में जिला से लेकर राज्य स्तर तक चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा और बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक चल रहे सांगठनिक पुनर्गठन के कार्यों की प्रगति की जांच होगी। राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर विस्तृत चर्चा और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी। आंदोलनात्मक रणनीति के अलावा इस बैठक में पार्टी के आंतरिक ढांचे को मजबूत करने पर भी गहन मंथन होगा। बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक चल रहे संगठन के पुनर्गठन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी और पार्टी को कैडर स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने के लिए निर्णायक फैसले लिए जाएंगे। इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष की अनुमति से राज्य के अन्य समसामयिक विषयों पर भी विचार रखा जाएगा। इस संबंध में झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने आधिकारिक कार्यालय आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत सभी केंद्रीय पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, सचिवों और संयोजकों को 20 अगस्त को रांची की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश दिया गया है।