रांची। डिजिटल भुगतान प्रणाली (यूपीआई) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) या शुल्क लगाए जाने की संभावना की खबरों को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियां आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली हैं।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सह मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि जिस यूपीआई को कभी देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताकर प्रचारित किया गया था, अब उसी पर शुल्क लगाने की तैयारी जनता के साथ आर्थिक अन्याय है।
कांग्रेस नेता ने नोटबंदी के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मोदी सरकार ने देश को 'कैशलेस इकोनॉमी' और डिजिटल पेमेंट्स अपनाने का तर्क दिया था। सरकार के इस आह्वान पर करोड़ों आम नागरिकों, छोटे दुकानदारों और व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान को अपनाया। आज जब यूपीआई देश की रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बन चुका है, तब इस पर शुल्क लगाने की बात सोचना जनता के विश्वास के साथ सीधा धोखा है।
सतीश पॉल मुंजनी ने कहा कि पहले सरकार "नो फीस ऑन यूपीआई" की बात करती थी, लेकिन अब चर्चा है कि केवल ₹2,000 तक के लेन-देन ही शुल्क-मुक्त रखे जा सकते हैं और उससे अधिक की राशि पर शुल्क लगाया जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के नाम पर पूरे देश को इस ओर धकेला गया, तो अब इस व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
कांग्रेस का कहना है कि यदि यह शुल्क लागू होता है तो इसका सीधा और प्रतिकूल असर छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
