रांची। झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर हलचल तेज हो गई है। परिसीमन के कारण आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ने की आशंका जताते हुए पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा और पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय स्थिति, विस्थापन, पलायन तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
चर्चा के दौरान राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल को सुझाव दिया कि वे अपनी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष भी रखें ताकि राज्य सरकार के स्तर पर इस दिशा में गंभीर पहल हो सके। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए और इसे केंद्र सरकार को भेजने की दिशा में काम होना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने संविधान की पांचवीं अनुसूची के पैरा 3 के तहत राज्यपाल से राष्ट्रपति को इस संबंध में रिपोर्ट भेजने का आग्रह किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि खनन, बांध, उद्योग, बिजली परियोजनाओं, सड़क और रेल निर्माण जैसी विकास परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी परिवारों का विस्थापन हुआ है। रोजगार की तलाश में हुए पलायन और बाहरी आबादी के आगमन से कई क्षेत्रों में डेमोग्राफिक बदलाव आया है। ऐसे में बिना इन परिस्थितियों का अध्ययन किए केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करना आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को नुकसान पहुँचा सकता है।
ज्ञापन में जो मांगें रखी गई हैं, उनमें वर्तमान में आदिवासियों को प्राप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सीटों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।राज्यपाल की ओर से इस पूरे मामले पर राष्ट्रपति को संवैधानिक रिपोर्ट भेजी जाए।
परिसीमन के संभावित प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन करने की मांग शामिल है।
इस प्रतिनिधिमंडल में बंधु तिर्की के अलावा डॉ. वासवी किड़ो, शशि पन्ना, रमा खलखो, दयामनी बारला, डॉ. रामचंद्र उरांव, अजय तिर्की, शिवा कच्छप और अनिल उरांव सहित अन्य प्रमुख लोग शामिल थे।
