​रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार के एमएमडीआर (खान और खनिज विकास और नियमन) बिल के खिलाफ अपने आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य की आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया, तो वे उग्र कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।

पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में 7 सितंबर को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक रूप लेगा और जरूरत पड़ने पर इसे राज्यव्यापी आंदोलन में तब्दील किया जाएगा।

आंदोलन के दूसरे चरण में सभी जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही झारखंड बंद और मशाल जुलूस जैसे कार्यक्रमों के जरिए भी विरोध दर्ज कराने की तैयारी है। झामुमो कार्यकर्ताओं को बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों में शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है।

​आंदोलन के तीसरे चरण के तहत झामुमो के कार्यकर्ता राजभवन के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे। पार्टी की योजना है कि राज्यपाल के माध्यम से एमएमडीआर बिल को लेकर झारखंड की प्रमुख आपत्तियों और चिंताओं को केंद्र सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

​झामुमो ने साफ किया है कि यदि राजभवन प्रदर्शन के बाद भी केंद्र सरकार बिल वापस लेने या संशोधन की दिशा में कोई कदम नहीं उठाती है, तो आंदोलन को अंतिम और चौथे चरण में ले जाया जाएगा। इसके तहत राज्यव्यापी आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता अपनाया जा सकता है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि इस दौरान झारखंड के भीतर खनन गतिविधियों को पूरी तरह रोकने और राज्य से खनिजों के परिवहन को ठप्प करने का काम किया जाएगा।