रांची। झारखंड में स्थानीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने और यहां के फिल्म उद्योग को समृद्ध बनाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इसके लिए शहरों से लेकर गांवों तक सकारात्मक सिनेमा कल्चर विकसित करने, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और सीड फंडिंग की व्यवस्था करने की जरूरत है। यह बात जाने-माने फिल्म संपादक एवं '72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' की नॉन-फीचर जूरी के अध्यक्ष असीम सिन्हा ने कही। वे रांची के सूचना भवन में 'झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड' (जेएफडीसीएल) द्वारा आयोजित “मीट द मेंटर” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

असीम सिन्हा ने जोर दिया कि राज्य में वित्तीय सहायता के साथ-साथ सिनेमाई इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण इलाकों में सिनेमा संस्कृति को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।क्षेत्रीय कलाकारों को आगे लाने के लिए मजबूत मेंटरिंग और स्क्रिप्ट मूल्यांकन प्रणाली के साथ सीड फंडिंग दी जानी चाहिए।

उन्होंने खुशी जताई कि पिछले 40 वर्षों से झारखंड में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना का उनका सपना अब साकार होता दिख रहा है। 100 से अधिक फिल्मों का संपादन कर चुके असीम सिन्हा ने श्याम बेनेगल, तिगमांशु धूलिया और केतन मेहता जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ काम के अनुभव साझा किए। इस अवसर पर विभाग के उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने उन्हें सम्मानित किया, जबकि संयुक्त निदेशक आनंद ने उनके 30 वर्षों के फिल्मी सफर पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में सहायक निदेशक अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।