​खूंटी। भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली व ननिहाल क्षेत्र के चलकद स्थित बारूडीह टोला के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गाँव में सेरेंगगड़ा नाले पर एक पक्के पुल की बाट जोहते ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे रहा है। पुल के अभाव में टोले के लगभग 60 से 70 स्कूली बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।​वर्षों पहले ग्रामीणों के पूर्वजों द्वारा पत्थरों से बनाया गया एक कच्चा बाँध ही आज गाँव के आवागमन का एकमात्र सहारा है।

​बरसात के दिनों में यह समस्या बेहद विकराल रूप ले लेती है।बारिश में नाले का जलस्तर बढ़ने और खेतों का पानी बहने से पत्थरों से बना यह संकरा रास्ता बेहद फिसलन भरा हो जाता है।किसी अनहोनी के डर से माता-पिता अपने बच्चों को खुद नाला पार कराकर स्कूल छोड़ने और वापस लाने को मजबूर हैं।

​नाले के उफान पर आते ही बारूडीह का संपर्क आसपास के पूरे इलाके से कट जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है।

​मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर मंडराता खतरा

​लगभग 100 से अधिक परिवारों की आबादी वाले बारूडीह टोले में स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार बरसात में अचानक किसी के बीमार पड़ने या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के दौरान हर पल दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार समय पर डाक्टरी इलाज न मिलने से स्थिति चिंताजनक हो जाती है।

​ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन के चौखट तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।हर साल बरसात हमारे लिए मुसीबत लेकर आती है। हम प्रशासन से गुहार लगाते हैं कि जल्द से जल्द सेरेंगगड़ा नाले पर पक्के पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके और गाँव को इस प्रशासनिक उपेक्षा से मुक्ति मिले।