रांची। झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी सीजीएल और उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित भारी धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दों को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी रांची को छोड़कर राज्य के 10 प्रमुख जिलों- जमशेदपुर, दुमका, पलामू, साहेबगंज, बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़, चतरा, धनबाद और सरायकेला-खरसावां में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और जिला उपायुक्तों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
पलामू में भाजयुमो जिलाध्यक्ष डॉ. विपुल गुप्ता के नेतृत्व में युवा कार्यकर्ताओं ने जिला परिषद कार्यालय मैदान से समाहरणालय के मुख्य द्वार तक आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान डॉ. विपुल गुप्ता ने कहा कि राज्य के छात्र पेपर लीक और सीटों की खरीद-फरोख्त जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर राजधानी रांची में सड़कों पर आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार पूरी तरह चुप्पी साधे बैठी है।
भाजयुमो ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में वर्ष 2019 के बाद आयोजित जेपीएससी और जेएसएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने और फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर भर्ती धांधली के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।
भाजयुमो ने कहा है कि पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।नेताओं ने 14वें जेपीएससी मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते का केवल इस्तीफा देना नाकाफी है। उन पर प्राथमिकी दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही जेपीएससी के तीनों सदस्यों की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग भी उठाई गई।
हाल ही में उत्पाद सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) के दौरान कई अभ्यर्थियों की हुई दुखद मृत्यु का मुद्दा उठाते हुए भाजयुमो ने राज्य सरकार से मांग की कि मृत अभ्यर्थियों के आश्रित परिजनों को अविलंब 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।
सरकार अपना रही है तानाशाही रवैयाः आदित्य
रांची। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में पेपर लीक मामले में युवाओं, छात्रों के आंदोलन पर विपक्षी दलों के नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया है। साथ ही छात्र आंदोलन के मामले में राज्य सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यहां युवा वर्ग न्याय मांग रहा है और विपक्षी पार्टियां कुंभकर्णी निद्रा में सोई हुई है। छात्र, युवा बारिश के मौसम में भींगते हुए डटे हुए हैं। लेकिन हेमंत सरकार का प्रशासन इतना संवेदनहीन हो गयी है कि प्रदर्शन स्थल पर धूप और बारिश से बचने के लिए तिरपाल तक लगाने की अनुमति नहीं दी गई। यह युवाओं पर हेमंत सरकार का तानाशाही रवैया ही तो है।
