रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा जेएसएससी-सीजीएल के माध्यम से हुई 1,975 नियुक्तियों को रद्द करने की घोषणा के बाद राज्य के प्रशासनिक महकमे और अभ्यर्थियों के बीच हड़कंप मच गया है। नियुक्ति रद्द होने का सीधा असर धरातल पर दिखने लगा है—सोमवार तक जो युवा सचिवालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे, मंगलवार को उन्हें प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार से ही वापस लौटा दिया गया। करीब सात महीने पहले अपनी नौकरी की शुरुआत करने वाले नवचयनित युवाओं के भविष्य पर अब गहरा संकट मंडरा रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम उस व्यापक छात्र आंदोलन का परिणाम है, जिसने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम को तीन हफ्तों से भी अधिक समय तक विरोध-प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बनाए रखा। पेपर लीक, नकल और धांधली के गंभीर आरोपों के बीच यह मुद्दा पूरे राज्य में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने वर्ष 2023 में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर, जूनियर सेक्रेटेरिएट असिस्टेंट, ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर और सर्किल इंस्पेक्टर जैसे कुल 2,025 पदों पर भर्ती के लिए 'सीजीएल 2023 (रेगुलर एवं बैकलॉग)' का विज्ञापन निकाला था। इसमें करीब 6.40 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया, जिनमें से 3 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को परीक्षा के लिए अंतिम रूप से योग्य पाया गया।
हालांकि, इस परीक्षा का पूरा सफर लगातार अड़चनों से घिरा रहा। पहले अक्टूबर 2023 और फिर दिसंबर 2023 की तय तिथियों पर परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकी। 28 जनवरी 2024 को परीक्षा आयोजित की गई, लेकिन पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया। इसके बाद 4 फरवरी की प्रस्तावित तिथि को भी परीक्षा नहीं हो सकी। आयोग ने 21-22 सितंबर 2024 को दोबारा परीक्षा आयोजित की, जिसमें 3.04 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। धांधली के आरोपों के बाद रांची के कोचिंग शिक्षकों, अभिभावकों और 1,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश और मंजूरी के बाद दिसंबर 2025 में परिणाम घोषित हुआ, जिसमें 1,932 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। 30 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंप दिए।
इस पूरे मामले की जांच राज्य की सीआईडी टीम कर रही थी। झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पक्ष रखा था कि विशेष जांच टीम (एसआईटी) को डिजिटल फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयानों के बाद भी पेपर लीक के सीधे सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र और आंदोलन की कोर कमेटी सीआईडी की जांच प्रक्रिया से असंतुष्ट रहे। छात्रों का आरोप है कि राज्य एजेंसी सरकार के दबाव में काम करती है और जांच निष्पक्ष नहीं रही। छात्रों का लगातार दबाव और निष्पक्ष 'सीबीआई जांच' की मांग ही आखिरकार इस निर्णय का आधार बनी, जिसके चलते राज्य सरकार को 1,975 नियुक्तियों को रद्द करने का कड़ा कदम उठाना पड़ा।
