रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्र आंदोलन के संदर्भ में हेमंत सरकार द्वारा कैबिनेट में लिए गए फैसलों पर तीखा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है ताकि छात्रों को ठगा जा सके। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की सीबीआई जांच नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल सकता।

पत्रकार वार्ता के दौरान श्री मरांडी ने सरकार की मंशा और नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी की नौकरियों को बेचने में सरकार में बैठे लोग शामिल हैं। परीक्षाओं को केवल रद्द कर देना समस्या का हल नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच के लिए मामले को तत्काल सीबीआई के सुपुर्द किया जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने फैसले से खुद पीठ थपथपा रही है, लेकिन असल में वह 'दोनों हाथों में लड्डू' चाहती है। परीक्षा रद्द होने के बाद गलत तरीके से चयनित अभ्यर्थी कोर्ट जाएंगे, जहां सीआईडी ढुलमुल रिपोर्ट पेश करेगी। इससे फैसले पर स्टे मिल जाएगा और पैसे देकर नौकरी पाने वाले बच निकलेंगे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी इस सरकार में साझेदार हैं, इसलिए वे छात्र हित पर चुप हैं और केवल दिखावा कर रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 से पद पर बने जेएसएससी के चेयरपर्सन और जांच की दिशा भटकने वाले सीआईडी अफसरों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

श्री मरांडी ने आंदोलनरत छात्रों का आह्वान किया कि वे सजग रहें और सीबीआई जांच की अपनी मांग पर अडिग रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सीबीआई जांच के आदेश नहीं दिए जाते, भारतीय जनता पार्टी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर यह लड़ाई जारी रखेगी।