राँची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मोरहाबादी मैदान में आयोजित ‘झारखण्ड आदिवासी महोत्सव-2026’ का भव्य उद्घाटन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएँ और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की चेतना इसकी विशिष्ट पहचान हैं। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जनजातीय जीवन-दर्शन पूरी मानवता को राह दिखाता है।
राज्यपाल ने कहा कि झारखण्ड का जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के संरक्षण का संदेश देता आया है। विकास की गति बनाए रखते हुए पर्यावरण एवं प्राकृतिक विरासत को सहेजना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राज्यपाल ने जनजातीय समाज से शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा साधन मानने का आह्वान किया। उन्होंने राष्ट्रपति एवं झारखण्ड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु जी के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के बल पर ही वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँची हैं।
केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने हजारीबाग से शुरू हुए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और प्रधानमंत्री के उलिहातू आगमन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिद्धो-कान्हू जैसे अमर नायकों के योगदान को याद किया। साथ ही, दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज के अधिकारों और स्वाभिमान के लिए आजीवन संघर्षरत रहे।
राज्यपाल ने उल्लेख किया कि झारखण्ड संविधान की पाँचवीं अनुसूची के तहत आता है। वे अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन, संरक्षण और जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा से पालन कर रहे हैं।
समारोह को संबोधित करने से पूर्व माननीय राज्यपाल ने महोत्सव परिसर में लगाई गई कला, संस्कृति और विकास प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया तथा जनजातीय कलाकारों के प्रयासों की सराहना की।
