रांची। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर बैक-टू-बैक दो पोस्ट कर राज्य सरकार और सीआईडी की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा घोटालों की जांच को लेकर सीआईडी और इसके एडीजी मनोज कौशिक की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जेपीएससी और सीजीएल परीक्षा घोटालों की जांच कर रही सीआईडी की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। उन्होंने कहा कि सीआईडी असली दोषियों और सत्ताधारी नेताओं को बचाने के लिए जानबूझकर कमजोर एफआईआर दर्ज कर रही है और सारा ठीकरा निजी एजेंसियों तथा छात्रों पर फोड़ रही है। जेपीएससी चेयरमैन से पूछताछ के बावजूद उनकी गिरफ्तारी न होना और जांच की जानकारियों को मीडिया में लीक करना, जनता का ध्यान भटकाने का एक प्रायोजित प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार के हाथ साफ हैं, तो वह इन महाघोटालों की जांच सीबीआई को क्यों नहीं सौंप देती?
डीजीपी नहीं, मनोज कौशिक के पास है पुलिस का असली नियंत्रण'
अपने दूसरे पोस्ट में नेता प्रतिपक्ष ने सीआईडी एडीजी मनोज कौशिक के अतीत पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि झारखंड में पुलिस का वास्तविक नियंत्रण डीजीपी के पास न होकर मनोज कौशिक के हाथ में है। मरांडी ने कहा कि वर्ष 2013-15 के दौरान हजारीबाग एसपी रहते हुए मनोज कौशिक पर कोयला और बालू तस्करी के गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी पुष्टि तत्कालीन आईजी मुरारीलाल मीणा की रिपोर्ट और बाद में एसीबी की निष्पक्ष जांच में भी हुई थी। एसीबी ने उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार से अनुमति भी मांगी थी।
मरांडी ने कहा कि दो-दो जांच रिपोर्टों में दागी पाए जाने के बावजूद सरकार ने ऐसे अधिकारी को तीन-तीन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी का प्रभार संभालते ही मनोज कौशिक ने सीजीएल जांच की दिशा बदल दी और हाईकोर्ट में भ्रामक शपथ पत्र देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। सत्ता के मनमाफिक काम करने की वजह से ही दागदार अफसरों को सीआईडी और एसीबी जैसे विभागों में बैठाया गया है ताकि वे राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर सकें।
