रांची। सहारा समूह में जमा अपनी जीवनभर की पूंजी वापस पाने के लिए रविवार को सैकड़ों पीड़ित निवेशकों ने रांची स्थित लोक भवन के पास सत्याग्रह किया। विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले आयोजित इस धरने में निवेशकों ने सरकार से अपनी मेहनत की कमाई का शीघ्र भुगतान कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की गुहार लगाई।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार झारखंड में सहारा की विभिन्न योजनाओं में करीब 32,600 करोड़ रुपये की विशाल राशि फंसी हुई है। परिपक्वता अवधि (मैच्योरिटी) पूरी होने के बाद भी भुगतान न मिलने से हजारों परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दैनिक खर्चों का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सत्याग्रह में शामिल निवेशकों ने दावा किया कि पैसों की तंगी और मानसिक तनाव के कारण राज्य में अब तक 74 निवेशकों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से कुछ ने आत्महत्या भी कर ली। प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि सरकार मृत निवेशकों के आश्रितों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान करे और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराए।
केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल के जरिए भुगतान जारी है।सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के आदेश पर सहारा-सेबी खाते से 5,000 करोड़ केंद्रीय रजिस्ट्रार को हस्तांतरित किए गए थे।
पोर्टल पर 1.45 करोड़ से अधिक आवेदनों के माध्यम से 4.06 करोड़ दावे दर्ज हुए। इनमें से 40.33 लाख निवेशकों को अब तक 8,783.55 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
शुरुआत में भुगतान सीमा 10,000 थी, जिसे बढ़ाकर 50,000 किया गया। मार्च 2026 से 10 लाख तक के दावों को इसमें शामिल किया गया है।
