रांची। मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में शनिवार को जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच और राज्य सरकार के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई। 1 घंटे से अधिक समय तक चली इस बैठक में 8 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल और सरकार द्वारा गठित 4 मंत्रियों के विशेष समूह के बीच किसी भी बिंदु पर आम सहमति नहीं बन सकी।
वार्ता विफल होने के बाद छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक 14वीं जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने सहित उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक जयपाल सिंह स्टेडियम में उनका विरोध प्रदर्शन और आंदोलन जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि कल देर शाम आंदोलन कर रहे एक अन्य गुट से भी सरकार की वार्ता बेनतीजा रही थी।
छात्र प्रतिनिधिमंडल की ओर से वार्ता में शामिल दीनबंधु मंडल ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से 14वीं जेपीएससी को तुरंत रद्द करने, अगले 6 महीनों के भीतर फिर से पारदर्शी तरीके से परीक्षा आयोजित करने तथा अन्य संबंधित मांगों को प्रमुखता से रखा।
छात्र नेता चंदन कुमार के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने और अन्य मांगों पर विचार कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
सुझावों के लिए जारी की गई ईमेल आईडी
बातचीत के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने एक आधिकारिक ईमेल आईडी(jpsc.jssc.feedback@gmail.com) जारी की। उन्होंने कहा कि कोई भी अभ्यर्थी, स्टेक होल्डर या नागरिक परीक्षा प्रणाली में सुधार और अन्य संबंधित विषयों पर ईमेल के माध्यम से अपनी राय और सुझाव भेज सकता है। सरकार इन सभी सुझावों पर विचार कर सामूहिक रूप से निर्णय लेगी।
वार्ता में सरकार की ओर से मंत्री दीपिका पांडे सिंह, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और मंत्री संजय कुमार यादव प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे।छात्रों की ओर से दीनबंधु मंडल, पूजा कुमारी, चंदन कुमार, बिमल कुमार, प्रेम कुमार, रविशंकर, अमित कुमार शर्मा और रामावतार महतो प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे।
आंदोलन तेज, विकल्पों पर बातचीत जारी
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को भी सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारी छात्रों के एक अन्य गुट से बातचीत की थी, लेकिन वह वार्ता भी बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हुई थी। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले रखे गए हैं।
दूसरी ओर, इस छात्र गुट की मांगों का समर्थन करते हुए जेएलकेएम नेता देवेन्द्र नाथ महतो पिछले छह दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
