​रांची। कुड़माली भाषा को संवैधानिक सम्मान और टोटेमिक कुड़मी/कुड़मी महतो समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की मांग अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक पहुँच गई है। गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और अन्य सामाजिक संगठनों के आह्वान पर झारखंड और ओड़िशा से लगभग 1000 लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली में जुट चुके हैं। समाज के लोग 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

​दिल्ली पुलिस द्वारा शुक्रवार की शाम इस कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने की सूचना के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। कुड़मी विकास मोर्चा सहित विभिन्न संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें केंद्र सरकार तक पहुँचाकर ही रहेंगे।

गिरिडीह सांसद सीपी चौधरी ने कहा कि कुड़माली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों की स्मृतियों, लोक-संस्कृति और सामाजिक विरासत की जीवंत अभिव्यक्ति है। टोटेमिक कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करना और कुड़माली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में स्थान देना पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने दिल्ली पहुंचे समर्थकों से अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का आह्वान किया है।

कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि झारखंड और ओड़िशा का कुड़मी समाज लंबे समय से संवैधानिक मान्यता का इंतजार कर रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भी सत्ता में आने पर इस विषय पर फैसला लेने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कुड़मी समाज की मांगों की उपेक्षा ही की गई है। शीतल ओहदार ने दोहराया कि समाज अब हर हाल में जंतर-मंतर से अपने अधिकार की मांग करेगा।