धनबाद। शिक्षक दिवस के अवसर पर धनबाद के मध्य विद्यालय बरमसिया की प्रभारी प्रधानाध्यापिका मुनमुन भट्टाचार्य को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें 50 हजार रुपये की नकद राशि, रजत पदक और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मुनमुन भट्टाचार्य को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोगों (नवाचार), सीमित संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सतत विकास लक्ष्यों को स्कूली शिक्षा से सफलतापूर्वक जोड़ने के लिए मिला है।
पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अपनी सोच साझा करते हुए मुनमुन भट्टाचार्य ने इसे केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की मेहनत का नतीजा है, जिसने धनबाद को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनका मानना है कि किसी भी शिक्षक की वास्तविक सफलता बच्चों की सीखने की क्षमता और उनके बेहतर भविष्य में होने वाले सुधार में छिपी है।
मध्य विद्यालय, बरमसिया में बच्चों को सतत विकास लक्ष्यों से जोड़कर जागरूक बनाया जा रहा है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए विद्यार्थियों को जल, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण जैसे व्यावहारिक विषयों से जोड़ा जा रहा है। शिक्षिका का मानना है कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें आसपास की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना बेहद जरूरी है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। विद्यालय में सीमित संसाधनों के बीच बेकार पड़े सामान से कम लागत और बिना लागत वाली शिक्षण सामग्रियां तैयार कर बच्चों को पढ़ाया जाता है। मुनमुन भट्टाचार्य के अनुसार, बच्चे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और आसपास के वातावरण से सबसे ज्यादा सीखते हैं, इसलिए उनके परिवेश को पढ़ाई का हिस्सा बनाना ही सच्ची शिक्षा है।
