रांची। झारखंड की राजनीति से रविवार, 6 सितंबर को एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री और गिरिडीह से विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 56 वर्ष की आयु में हार्ट अटैक से अचानक निधन हो गया। उनके निधन से राज्यभर में शोक की लहर दौड़ गई है।
साधारण कार्यकर्ता से मंत्री पद तक का सफर
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर सादगी और कड़े संघर्ष की मिसाल रहा।
1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की सदस्यता ली। उन्होंने पार्टी के लिए पोस्टर चिपकाने, दीवार लेखन करने और झंडा लेकर गांव-गांव प्रचार करने से शुरुआत की।
1992 में गिरिडीह नगर कमेटी के संस्थापक अध्यक्ष बने और बाद में गिरिडीह जिला अध्यक्ष का पद संभाला।
2009 और 2014 के चुनावों में असफल रहने के बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा। आखिरकार, 2019 में पहली बार गिरिडीह से विधायक चुने गए और 2024 में दोबारा जीत दर्ज कर हेमंत सोरेन कैबिनेट में मंत्री बने।वह उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
हेमंत सरकार और शिक्षा विभाग से जुड़ा दुखद संयोग
सुदिव्य सोनू के निधन के साथ ही झारखंड के राजनीतिक गलियारों में एक खौफनाक और अजीब संयोग फिर से चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यकाल के दौरान अब तक कैबिनेट के 4 मंत्रियों का निधन हो चुका है, जिनमें से 3 मंत्रियों का संबंध सीधे 'शिक्षा विभाग' से रहा है।
हाजी हुसैन अंसारी
मधुपुर से विधायक और मंत्री, जिनका 2020 में कोरोना संक्रमण के बाद निधन हुआ।
जगरनाथ महतो
डुमरी विधायक और तत्कालीन स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री, जिनका लंबे इलाज और फेफड़े के ट्रांसप्लांट के बाद 6 अप्रैल 2023 को निधन हुआ।
रामदास सोरेन
घाटशिला से विधायक व स्कूली शिक्षा मंत्री, जिनका 15 अगस्त 2025 को निधन हो गया था।
सुदिव्य कुमार सोनू
गिरिडीह विधायक व उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, जिनका 6 सितंबर 2026 को हार्ट अटैक से निधन हुआ।
महज साढ़े तीन साल के भीतर शिक्षा विभाग (स्कूली एवं उच्च शिक्षा) संभालने वाले तीन मंत्रियों का असमय चले जाना राज्य की राजनीति में एक बेहद दुखद और चौंकाने वाला संयोग बनकर उभरा है। झामुमो ने जहां अपना एक वरिष्ठ और जमीनी नेता खो दिया है, वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका है।
