​रांची। झारखंड में बाल विवाह को रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों और प्रशासनिक सख्ती के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। बच्चों के संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन' (जेआरसी) के अनुसार राज्य में बाल विवाह की दर में करीब 3 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएसएच-5, 2019-21) के अनुसार, झारखंड में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के विवाह का आंकड़ा 32.2 प्रतिशत था। वहीं, एनएफएसएच-6 (2023-24) के नए आंकड़ों में यह घटकर 28.1 प्रतिशत पर आ गया है। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर पर बाल विवाह की दर 20.1 प्रतिशत है, जिसे और कम करने के लिए प्रयास जारी हैं।

जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु ने बताया कि पिछले तीन सालों में संगठन ने झारखंड के सभी 24 जिलों में अपने 21 सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर 1,14,114 बाल विवाह रुकवाए हैं। वहीं, पूरे देश में यह आंकड़ा 5.50 लाख से अधिक रहा है।​उन्होंने इस सफलता का श्रेय केंद्र सरकार और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के निर्णायक नेतृत्व को दिया।

भारत सरकार ने 2026 तक देश में बाल विवाह की दर को 10 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा है। भुवन ऋभु के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयासों से उम्मीद है कि वर्ष 2026 के अंत तक यह आंकड़ा 15 प्रतिशत से भी नीचे आ जाएगा। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 5.3 के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य 2030 तक बाल विवाह और जबरन विवाह जैसी प्रथाओं को पूरी तरह खत्म करना है।