रांची। झारखंड,जिसे अब तक देश की 'खनिज राजधानी' और भारी उद्योगों के केंद्र के रूप में ही पहचाना जाता था, आज विकास की एक नई और आधुनिक इबारत लिखने की दहलीज पर खड़ा है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित भव्य मीट में झारखंड सरकार ने देश के शीर्ष औद्योगिक घरानों से एक लाख लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू पर हस्ताक्षर कर इतिहास रच दिया है। यह निवेश केवल फैक्ट्रियों और कारखानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य को देश के अगले बड़े "टेक एंड एआई हब" के रूप में स्थापित करने का एक क्रांतिकारी रोडमैप है।

क्या यह एक लाख करोड़ रुपए का निवेश झारखंड की अर्थव्यवस्था की पारंपरिक रीढ़ को 'नॉलेज और टेक्नोलॉजी-बेस्ड इकॉनमी' में बदल पाएगा? कैसे सुदूर गांवों के युवाओं तक कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल करियर के अवसर पहुंचेंगे? और सबसे महत्वपूर्ण सालों से झेल रहे 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) के दंश को यह सरकार 'ब्रेन गेन' में कैसे बदलेगी?

यह एक लाख करोड़ रुपए का निवेश सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के बड़े औद्योगिक घरानों और निवेशकों का झारखंड की क्षमता, वर्तमान सरकार और उनकी नीतियों पर अटूट भरोसे का प्रमाण है। अब तक झारखंड को सिर्फ खनिज संपदा और भारी उद्योगों के चश्मे से देखा जाता था, लेकिन यह मीट हमारे राज्य के इतिहास में एक नया टर्निंग पॉइंट हो सकता है।

इससे झारखंड की अर्थव्यवस्था का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि 'माइनिंग बेस्ड इकॉनमी' से आगे बढ़कर 'नॉलेज और टेक्नोलॉजी बेस्ड इकॉनमी' की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। यह निवेश राज्य के राजस्व को बढ़ाएगा, इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा और झारखंड को देश के सबसे तेजी से बढ़ते प्रगतिशील राज्यों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करेगा।

समय बदल रहा है, और बदलाव के साथ कदम न मिलाना पिछड़ेपन को निमंत्रण देना है। झारखंड के पास देश की सबसे युवा और ऊर्जावान आबादी में से एक है। सरकार का यह मानना है कि युवाओं को सिर्फ पारंपरिक मजदूरी या मैन्युअल लेबर तक सीमित नहीं रख सकते।

आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी का है। जब यहां के बच्चे देश-दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को अपनी सेवाएं दे सकते हैं, तो वो यह काम झारखंड की धरती पर रहकर क्यों नहीं कर सकते? मुख्यमंत्री का विजन झारखंड को एक ऐसा 'टेक हब' बनाना है, जहां पर्यावरण की हरियाली और आधुनिक तकनीक का एक खूबसूरत संतुलन हो।

निवेशक वहां जाते हैं जहां उन्हें सुरक्षा, स्पष्ट नीति और लालफीताशाही से मुक्ति मिलती है। मुख्यमंत्री का मानना है कि हमने अपनी नई औद्योगिक नीति को बेहद 'इन्वेस्टर-फ्रेंडली' और पारदर्शी बनाया है।