​रांची। पूर्व विधायक सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सुधार की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों को मानवीय आधार पर वापस लेने का आग्रह किया है।

​मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सीता सोरेन ने कहा कि परीक्षाओं में विसंगतियों, पेपर लीक की आशंकाओं और पारदर्शिता की कमी से राज्य के युवाओं में भारी आक्रोश था। युवाओं ने अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था, जो किसी कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए नहीं, बल्कि अपने रोजगार और सुरक्षित भविष्य की स्वाभाविक मांग थी।

​उन्होंने पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा कि एफआईआर दर्ज होने से युवाओं का करियर दांव पर लग गया है, जिससे भविष्य में सरकारी नौकरी के सत्यापन में गंभीर बाधा आएगी।

​मध्यम और गरीब वर्ग से आने वाले छात्र परीक्षाओं की अनियमितताओं के साथ-साथ मुकदमों के बोझ और मानसिक अवसाद से जूझ रहे हैं।

युवा राज्य की संपत्ति हैं, अपराधी नहीं। अपनी जायज मांगों के लिए आवाज उठाने वाले इन छात्रों के प्रति सरकार को अभिभावक की तरह रुख अपनाना चाहिए।

​पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल आंदोलन के दौरान परीक्षार्थियों और छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों की समीक्षा की जाए और मानवीय आधार पर इन सभी मामलों को अविलंब वापस लेने हेतु संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाए।