रांची। जेएसएससी-सीजीएल के सफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ बुधवार को भी अपना आंदोलन जारी रखा। सुबह में जिला प्रशासन द्वारा प्रोजेक्ट भवन के बाहर बनाए गए अस्थायी पंडाल को हटाए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

प्रशासनिक कार्रवाई से आक्रोशित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के बाहर लगी बैरिकेडिंग तोड़ दी और गेट के भीतर प्रवेश कर गए। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी धक्का-मुक्की और तीखी बहस हुई। इसके बाद मौके पर माहौल गर्मा गया और अभ्यर्थी लगातार नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक उनकी सुनवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने परीक्षा रद्द करने का फैसला वापस लेकर नियुक्ति देने और शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए पास में ही जगह आवंटित करने की मांग की।

इस दौरान कई अभ्यर्थी भावुक होकर रोते हुए न्याय की गुहार लगाते दिखे। उनका कहना था कि मेहनत से परीक्षा पास कर नौकरी मिलने के बाद अचानक रद्द करने के फैसले से उनका भविष्य संकट में आ गया है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार से न्याय नहीं मिला, तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।

देर शाम अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन से चांदनी चौक (हटिया) तक पैदल मार्च भी निकाला। क्षेत्र में बने तनाव को देखते हुए प्रोजेक्ट भवन परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

नियुक्ति रद्द करने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बाद अब मामला कानूनी दांव-पेंच में फंस गया है। परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होकर पदों पर कार्यरत नवनियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा है, जिसके बाद उन्होंने न्याय के लिए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

जानकारी के अनुसार जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं के जरिए नियुक्त होकर विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे अभ्यर्थियों ने सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस फैसले के खिलाफ फिलहाल तीन अभ्यर्थियों ने याचिका दाखिल की है, जिसमें सरकार के निर्णय पर गंभीर सवाल उठाते हुए कार्यरत कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और नियुक्ति बहाल रखने की मांग की गई है।

अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के रुख पर टिकी हैं कि जब इस मामले की सुनवाई शुरू होगी, तब अदालत सरकार के फैसले और प्रभावित नवनियुक्त कर्मचारियों के भविष्य पर क्या निर्णय लेती है। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।