रांच। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों की समय से पूर्व रिहाई को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार का पक्ष सुना और राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बीते 30 जुलाई को हुई बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद तय की गई है।

इससे पहले राज्य सरकार की ओर से अदालत में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया था कि निर्धारित तीन माह के भीतर बोर्ड की बैठक का आयोजन क्यों नहीं हो सका। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि 30 जुलाई को संपन्न हुई बैठक में क्या निर्णय लिए गए, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी।

सुनवाई के क्रम में हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त अधिवक्ता अमित कुमार दास ने पक्ष रखा, जबकि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) की ओर से अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने पैरवी की।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने राज्यों में सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठकें समय पर आयोजित करने के स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत बोर्ड को प्रत्येक तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक करना अनिवार्य है। झारखंड हाईकोर्ट इसी जनहित याचिका के जरिए राज्य में इन दिशानिर्देशों के अनुपालन और कैदियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।