जमशेदपुर। मानगो नगर निगम की 18 अगस्त को हुई बोर्ड बैठक को लेकर उप महापौर ने बुधवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर बैठक की प्रक्रिया, पार्षदों की सहभागिता और टेंडर प्रस्तावों पर सवाल उठाए। उन्होंने बैठक की कार्यवाही और टेंडर से जुड़े प्रस्तावों की विधिक व प्रशासनिक समीक्षा कराने की मांग की।
उप महापौर ने कहा कि नगर निगम की बोर्ड बैठक स्थानीय निकाय की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें निर्वाचित पार्षदों की सहभागिता और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता मिलना जरूरी है। उन्होंने झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 74(1) का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड की बैठक नियमित रूप से होनी चाहिए, जबकि 18 अगस्त की बैठक करीब चार माह बाद आयोजित की गई।
उन्होंने भविष्य में नियमित रूप से बोर्ड बैठक आयोजित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की, ताकि वार्डों की समस्याओं पर समय रहते चर्चा और निर्णय लिया जा सके।
ज्ञापन में पिछली बैठकों की कार्यवाही की संपुष्टि और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। उप महापौर ने कहा कि पूर्व बैठकों की कार्यवाही का नियमानुसार अनुमोदन और संपुष्टि जरूरी है। इसके बाद ही संबंधित निर्णयों और प्रस्तावों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने 18 अगस्त की बैठक में लिए गए निर्णयों तथा टेंडर प्रस्तावों की विधिक समीक्षा कराने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि पार्षद अपने-अपने वार्ड की जनता की समस्याओं को बोर्ड के समक्ष रखते हैं। ऐसे में पेयजल, सड़क, नाली, सीवेज, स्वच्छता और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी समस्याओं से जुड़े जनहित के प्रस्तावों को एजेंडा में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
बैठक में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपस्थिति पंजी का विधिवत संधारण और बोर्ड बैठक की वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग भी की गई है।
उप महापौर ने उपायुक्त से 18 अगस्त की बोर्ड बैठक की पूरी कार्यवाही, लिए गए निर्णयों और टेंडर प्रस्तावों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि निगम की कार्यप्रणाली पारदर्शी, सहभागी और नियमसम्मत होनी चाहिए, ताकि आम जनता से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान हो सके।
