रांची। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी को पत्र लिखकर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के संभावित प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का ध्यान इस विधेयक से झारखंड के सामने उत्पन्न होने वाली वित्तीय और विकासात्मक चुनौतियों की ओर आकृष्ट कराया है।

एनडीए के घटक दल का हिस्सा होने के बावजूद सुदेश महतो ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अलग रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य और जनता के हितों के विरुद्ध लिया गया कोई भी फैसला झारखंड को स्वीकार नहीं होगा।

सुदेश महतो ने पत्र में उल्लेख किया कि प्रस्तावित संशोधन विधेयक के प्रावधानों से 'मिनरल बेयरिंग लैंड' पर राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से टैक्स, सेस या लेवी लगाने का अधिकार प्रभावित हो सकता है। खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड जैसे राज्य की आर्थिक स्थिति पर इसका सीधा और प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार को मिनरल बेयरिंग लैंड पर सेस वसूलने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए, ताकि इस राजस्व का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास में किया जा सके।

राज्य में जारी अवैध कोयला खनन का मुद्दा उठाते हुए सुदेश महतो ने खदानों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस तंत्र के संरक्षण में चल रहे अवैध खनन पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

उन्होंने तर्क दिया कि अवैध खनन रुकने से आधिकारिक कोयला उत्पादन बढ़ेगा, जिससे राज्य सरकार की रॉयल्टी और राजस्व में बढ़ोतरी होगी। इस राजस्व का इस्तेमाल गरीब व जरूरतमंदों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाने में किया जा सकेगा।

सुदेश कुमार महतो ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार राज्य के हितों और जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाएगी। उन्होंने इस पत्र की एक प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई और सूचना के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी भेजी है।