​चाईबासा। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और झारखंड सरकार की "आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति" का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखने लगा है। कई दशकों से नक्सलवाद और हिंसा का दंश झेल रहे कोल्हान, पोराहाट और सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है। इसी कड़ी में आज पुलिस उप महानिरीक्षक (कोल्हान क्षेत्र) एवं पुलिस उप-महानिरीक्षक (सीआरपीएफ रेंज, चाईबासा) के समक्ष भा०क०पा० (माओवादी) संगठन के 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर सालुका कायम सहित 04 सक्रिय नक्सलियों ने आधिकारिक रूप से अपने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

​सालुका कायम उर्फ भुवनेश्वर उर्फ मारू उर्फ विक्रम (जोनल कमेटी सदस्य)कुल 96 केस दर्ज है। उसके पास से एक AK-47 राइफल, 2 मैगजीन, 843 राउंड कारतूस एवं अन्य सामग्री बरामद हुए हैं।आत्मसमर्पण करने वाले अन्य नक्सलियों में ​कोदोमुनी कोड़ा उर्फ कित्तामाई (दस्ता सदस्य)

​पता: ग्राम-रेगडाहातु, थाना-टोंटो,​विकी पूर्ती उर्फ सुकांती पूर्ती उर्फ मैचो पुरती (दस्ता सदस्य) और ​अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम उर्फ मुक्ता (दस्ता सदस्य) से भी हथियार आदि बरामद हुए हैं।

​यह सफलता चाईबासा पुलिस, सी०ए०पी०एफ०, झारखंड जगुआर और आसूचना एजेंसियों के संयुक्त अभियान का परिणाम है। संगठन के भीतर आंतरिक शोषण, भय, और सारंडा में सुरक्षा बलों के नए कैंपों की स्थापना से नक्सलियों का मोहभंग हुआ है। साथ ही चक्रधरपुर के एसडीपीओ डॉ० सौद मुस्तफा हाशमी द्वारा सुदूर क्षेत्रों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों और सामुदायिक पुलिसिंग ने ग्रामीणों के बीच विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।​सरायकेला पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सीमावर्ती इलाकों में चलाए गए अभियान के दबाव में आकर अनिता तामसोय ने भी आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।