चाईबासा। चाईबासा में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से पदयात्रा कर रहे समाज के बुद्धिजीवियों, मानकी-मुंडाओं, युवाओं, समाजसेवियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की प्रशासन द्वारा की गई गिरफ्तारी के बाद हो समाज में व्यापक नाराजगी और चिंता का माहौल है। इस मामले को लेकर आदिवासी हो समाज युवा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद बिरुवा ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। गोविंद बिरुवा ने कहा कि समाज के लोग पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर अपनी जनभावनाओं को प्रशासन तक पहुंचाने निकले थे। उन्होंने कहा कि कोल्हान में कोल्हान के स्थाई लोगों को जगह मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज चाहता है कि ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय सभी पक्षों से संवाद और सहमति के आधार पर लिए जाएं, ताकि सामाजिक सौहार्द और भाईचारा कायम रहे।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष ईपील सामड ने कहा कि समाज की ओर से पूर्व में ही प्रशासन को लिखित रूप से मध्यस्थता एवं वार्ता के लिए अनुरोध किया गया था। बावजूद इसके प्रशासन ने राजनीतिक पार्टी के दबाव में एकतरफा कार्रवाई कर कोल्हान के आदिवासियों की आवाज को दबाने का कार्य किया है। ईपील सामड ने कहा कि कोल्हान के हो आदिवासियों ने पूरे कोल्हान में जेएमएम का समर्थन कर अबुआ सरकार बनाने में अतुलनीय योगदान दिया है। लेकिन पश्चिमी सिंहभूम जिला जेएमएम समिति ने कोल्हान के उन वीर योद्धाओं को नजरअंदाज कर अपनी पार्टी के दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर जिस प्रकार की बयानबाजी एवं हठधर्मिता दिखाई है, उससे उनका वास्तविक चरित्र उजागर हो गया है।
