​रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक पारे में उबाल आ गया है। इस मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने हैं। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर एसआईआर प्रक्रिया को प्रभावित करने का सीधा आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ बगोदर के पूर्व विधायक विनोद सिंह ने ड्राफ्ट सूची में शामिल मतदाताओं को बड़े पैमाने पर नोटिस भेजे जाने पर गहरी नाराजगी जाहिर की है।

​ श्री मरांडी ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे संवेदनशील काम में राजनीतिक दखलअंदाजी नहीं होनी चाहिए।आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र ऑफलाइन जारी करने के निर्देशों पर उंगली उठाते हुए उन्होंने आशंका जताई कि इससे मतदाता सूची की शुद्धता प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि साहिबगंज समेत संताल परगना के कई विधानसभा क्षेत्रों में 2019 से 2024 के बीच मतदाताओं की संख्या में हुई कथित असामान्य वृद्धि पर जांच की मांग की।गोड्डा में भाजपा के अधिकृत कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने की घटना पर भी उन्होंने सरकार को घेरा।

​विनोद सिंह ने ड्राफ्ट सूची में पहले से शामिल मतदाताओं को नोटिस दिए जाने को अनुचित बताया। औसतन प्रति बूथ 100 से अधिक लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। महतो-यादव, प्रसाद-मंडल और मियां-अंसारी जैसे उपनामों (टाइटल) के आधार पर मतदाताओं को संदिग्ध बनाया जा रहा है।एसआईआर का उद्देश्य नाम जोड़ना नहीं, बल्कि तकनीकी बहाने बनाकर वैध मतदाताओं के नाम काटना बन गया है। अधिकारियों के रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।