रांची। राज्य के सत्तारूढ़ महागठबंधन के घटक दलों ने केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को प्रदेश राजद कार्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान राजद, सीपीआई और भाकपा माले के नेताओं ने इस विधेयक को राज्यों के संवैधानिक एवं वित्तीय अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया।
राजद उपाध्यक्ष अनीता यादव ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर यहां की जनता का पहला अधिकार है। केंद्र सरकार को सहकारी संघवाद का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2024 में आए सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि राज्यों को खनिज और खनिज युक्त भूमि पर कर/उपकर लगाने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य के राजस्व स्रोतों को कमजोर करने से 'मंईयां सम्मान योजना' जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक और जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे प्रभावित होंगी।
भाकपा माले नेता शुभेंदु सेन और अनंत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर राज्यों के नियंत्रण को छीनना संविधान की मूल भावना के विपरीत है, जिससे राज्य का वित्तीय ढांचा चरमरा जाएगा।
महागठबंधन नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि संशोधन विधेयक 2026 को तुरंत रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
सीपीआई नेता अजय कुमार ने बताया कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट है। आगामी 22 अगस्त को 'इंडिया' गठबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें सड़क से लेकर सदन तक के आंदोलन की आगे की रूपरेखा तय की जाएगी।
