रांची/नई दिल्ली। कुड़मी संगठनों से जुड़े लोगों ने रविवार को पुलिस की भारी मौजूदगी के बीच नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'ब्लैक डे' मनाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की प्रमुख मांग रखी।

अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति भवन से जंतर-मंतर तक पैदल मार्च निकाला। इस दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी गहमागहमी देखने को मिली। कार्यक्रम शुरू होते ही दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की टीम ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिन्हें देर शाम छोड़ा गया। पुलिस कार्रवाई के कारण केवल कुछ लोग ही टुकड़ों में जंतर-मंतर तक पहुंच सके।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित महतो ने कहा कि वर्ष 2023 के आंदोलन के दौरान उन्हें 71 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें दिल्ली से फिर जेल जाना पड़े, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। नेतृत्वकर्ता शीतल ओहदार ने बताया कि 6 सितंबर 1950 को छोटानागपुर पठार के टोटेमिक गोष्ठीधारी कुड़मी महतो समाज के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ था। 1950 से पहले यह समाज 12 अन्य जनजातियों के साथ 'एबोरिजिनल ट्राइब एनिमिस्ट' के रूप में दर्ज था। हालांकि, नई एसटी सूची जारी करते समय इन्हें इस सूची से हटाकर ओबीसी श्रेणी में डाल दिया गया। शीतल ओहदार ने दावा किया कि अंग्रेजों के 'शिमला गैजेट' के नोटिफिकेशन के आधार पर कुड़मी समाज का वास्तविक हक एसटी सूची में ही बनता है। इसी फैसले के विरोध में वर्ष 2017-18 से हर साल 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर 'ब्लैक डे' मनाया जा रहा है।