रांची। पेट्रोल पंपों पर यूपीआई से होने वाले ईंधन भुगतान पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क एमडीआर को लेकर पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, साउथ छोटानागपुर ,झारखंड ने चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजहंस मिश्रा ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री को पत्र भेजकर डीलर कमीशन की तत्काल समीक्षा करने और इस नई लागत को डीलर कमीशन की संरचना में शामिल करने की मांग की है।
गौरतलब है कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर एमडीआर लागू होने की संभावना है। ईंधन जैसी श्रेणियों के लिए ₹5 का फ्लैट एमडीआर प्रस्तावित है, जो ग्राहक के बजाय सीधे डीलर से वसूला जाएगा।
एसोसिएशन का कहना है कि कर्मचारियों के वेतन, बिजली, बैंकिंग खर्च, ऑटोमेशन, सुरक्षा और रखरखाव जैसे परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त एमडीआर लागू होने से डीलरों के पहले से सीमित मार्जिन पर भारी दबाव पड़ेगा।
पत्र में दिए गए उदाहरण के अनुसार यदि किसी पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन ₹2,000 से अधिक के 200 UPI लेनदेन होते हैं, तो ₹5 प्रति लेनदेन की दर से प्रतिदिन ₹1,000 का अतिरिक्त खर्च आएगा। यह राशि प्रतिमाह लगभग ₹30,000 और सालाना ₹3.65 लाख तक पहुंच सकती है।
संगठन ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल पंपों ने देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब डीलरों ने इसके लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया है, तो इससे जुड़ी नई लागत का पूरा भार उनके मौजूदा ऑपरेटिंग मार्जिन पर डालना न्यायसंगत नहीं है।
एसोसिएशन की मुख्य तीन मांगें
डिजिटल लेनदेन से जुड़ी नई लागतों को डीलर कमीशन की लागत संरचना में आधिकारिक रूप से जोड़ने,बढ़ती परिचालन लागतों और पुराने पड़ चुके मार्जिन को देखते हुए डीलर कमीशन की नए सिरे से समीक्षा करने और
यूपीआई/एमडीआर से होने वाले अतिरिक्त वित्तीय खर्च की भरपाई के लिए उचित रिइंबर्समेंट या क्षतिपूर्ति मॉडल लागू करना है।
