रांची। केंद्रीय वित्त मंत्री की मौजूदगी में आयोजित 'विकसित भारत 2047: राज्यों का वित्तपोषण' सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार की नीतियों और विकास के मापदंडों पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) या प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी से देश विकसित नहीं हो सकता; इसके लिए सामाजिक विकास, धर्म-जाति से परे राजनीति और पिछड़े राज्यों को वित्तीय सहायता देना अनिवार्य है।
श्री किशोर ने कहा कि केवल विनिर्माण और आंकड़ों से विकसित भारत नहीं बनेगा। भारत में चालू कीमतों पर औसत प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹2.05 लाख है, जो दुनिया के शीर्ष 25 देशों से काफी कम है। धन का असमान वितरण और 70% ग्रामीण आबादी का कृषि पर निर्भर होना बड़ी चिंता का विषय है। सिंचाई और संबद्ध कृषि क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तपोषण की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जाति-धर्म पर आधारित राजनीति से सामाजिक विकास संभव नहीं है। जब तक सामाजिक रूप से देश सशक्त नहीं होगा,आर्थिक प्रगति बेमानी है। केंद्र की आर्थिक नीतियों, जैसे जीएसटी कर युक्तिकरण और वीबी-जीरामजी(मनरेगा) से झारखंड को ₹6,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, खान-खनिज विकास विनियमन (MMDR Act Revision) संशोधन के कारण राज्य द्वारा खनिज भूमि पर नया टैक्स या सेस लगाने पर रोक से लगभग ₹14,000 करोड़ की क्षति हुई है। कुल मिलाकर झारखंड को ₹20,000 से ₹22,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। साथ ही, धारा 9(D) के कारण विभिन्न कोल कंपनियों पर बकाया ₹1.36 लाख करोड़ की वसूली में भी बाधा आई है।
उन्होंने झारखंड की वित्तीय उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति आयोग की 'अचीवर श्रेणी' में टॉप 3 राज्यों (ओडिशा और गोवा के साथ) में शामिल। कुल राजस्व में अपने कर का हिस्सा 60% से अधिक और गैर-कर राजस्व में भी बेहतरीन प्रदर्शन है।
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) GSDP के 3% की सीमा से नीचे बनाए रखा। विकास कार्यों के लिए GSDP का 4-5% खर्च किया।कुल कर्ज GSDP के 25% से कम और ब्याज का बोझ नियंत्रण में।
वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत झारखंड को खनन कार्य पर सेस लगाने का अधिकार पुनर्बहाल करने,जीएसटी कर युक्तिकरण से हुई क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा देने औरपिछड़े राज्यों के लिए वीबी-जीरामजी(मनरेगा) योजना में केंद्र-राज्य वित्तपोषण अनुपात 60:40 से बदलकर पुनः 90:10 करने की मांग की।
