रांची। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने पूरे प्रदेश में मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को राज्यभर के सभी 260 प्रखंड मुख्यालयों के बाहर झामुमो के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकदिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार से इस कानून को अविलंब वापस लेने की पुरजोर मांग की।

राजधानी रांची के नामकुम प्रखंड कार्यालय के समक्ष भी झामुमो कार्यकर्ताओं का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। हाथ में पार्टी का झंडा और तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि यह संशोधन झारखंड के अधिकारों पर सीधा हमला है और जब तक इसे वापस नहीं लिया जाता, पार्टी का आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

धरना-प्रदर्शन को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए झामुमो के शीर्ष नेतृत्व द्वारा पहले ही व्यापक रणनीति तैयार की गई थी। राज्य के सभी प्रखंडों में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और पदाधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

प्रदर्शन के दौरान झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक और खनिज संसाधनों से समृद्ध राज्य है। केंद्रीय संशोधन विधेयक राज्य के राजस्व और भूमि पर स्थानीय अधिकारों को प्रभावित करता है। वक्ताओं का कहना था कि बिना राज्य सरकार और स्थानीय हितों को ध्यान में रखे बनाए गए इस कानून को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

धरना-प्रदर्शन के समापन पर सभी प्रखंड मुख्यालयों में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से केंद्र सरकार के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। कार्यक्रम के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस-प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

झारखंड के खनिज अधिकारों पर केंद्र का डाका: विनोद

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने केंद्र की भाजपा सरकार के नए खनिज कानून को राज्य के अधिकारों पर डाका करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस जनविरोधी कानून के खिलाफ झामुमो का 'उलगुलान' (आंदोलन) अब प्रखंड मुख्यालयों से निकलकर गांव-गांव तक पहुंच चुका है। झारखंड की जनता ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के संवैधानिक अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी।

झामुमो महासचिव ने कहा कि माइन्स एंड मिनरल्स डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन (एमएमडीआर) संशोधन कानून केवल झारखंड के खनिज राजस्व पर हमला नहीं है, बल्कि यह राज्यों के संवैधानिक अधिकारों और वित्तीय स्वायत्तता को सीधे तौर पर कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ केंद्र सरकार राज्य की खनिज संपदा पर अपना अधिकार बढ़ाना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड के सालों पुराने वैध बकाये के भुगतान पर भाजपा जवाब देने से भाग रही है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए विनोद पांडेय ने कहा कि भाजपा पहले 1.36 लाख करोड़ रुपये का हिसाब मांगती थी, लेकिन अब उसे खुद इस राशि का जवाब देना चाहिए।

विनोद पांडेय ने कहा कि खनन के कारण प्रदूषण, विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और सामाजिक समस्याओं की भारी कीमत झारखंड के लोग चुकाते हैं। ऐसे में राज्य को उसके वाजिब राजस्व और अधिकारों से वंचित करने की कोशिश को झारखंड की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

सड़क से लेकर अदालत तक लड़ी जाएगी लड़ाई

आंदोलन की भावी रूपरेखा साझा करते हुए उन्होंने बताया कि झामुमो ने प्रखंड मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब इस उलगुलान को और व्यापक बनाया जाएगा।

अगला चरण जिला मुख्यालयों पर जोरदार विरोध-प्रदर्शन और अंतिम चरण में राज्य स्तरीय विशाल जन-आंदोलन होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में यह लड़ाई सड़क से लेकर संवैधानिक और कानूनी मंचों तक पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी। जब तक केंद्र सरकार झारखंड के हितों के खिलाफ लाए गए प्रावधानों पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। यह लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि झारखंड के अस्तित्व, उसकी खनिज संपदा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा की लड़ाई है।