रामगढ़। हजारीबाग के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रामगढ़ समाहरणालय परिसर में औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच रिपोर्ट की मांग को लेकर चल रहे धरने के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।

यशवंत सिन्हा ने कहा कि इस प्रक्रिया की सबसे गाज गरीब और कम पढ़े-लिखे लोगों पर गिर रही है। किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से कटना उसके लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन है। हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले मजदूरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रवासी लोग चुनाव के वक्त वोट डालने अपने घर लौटते हैं। यदि एसआईआर के तहत उनके नाम काट दिए जाएंगे, तो वे मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से बाहर न होने पाए।

अपने दावों को मजबूती देने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि वहां एसआईआर के दौरान चुनाव से पहले करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।

उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट में स्वीकार किया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के तहत 27.16 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और फर्जी/डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल थीं। इनमें से 22 लाख से अधिक लोगों ने पुन: नाम जुड़वाने के लिए अपील दायर की है।