रांची। झारखंड में परिसीमन और खान एवं खनिज विकास संशोधन बिल के खिलाफ आदिवासी समाज अपनी आवाज बुलंद करने जा रहा है। रांची के मोरहाबादी में आयोजित होने वाली 'आदिवासी एकता महाजुटान रैली' के जरिए राज्य में आदिवासी जमीनों के अधिग्रहण, सरना धर्म कोड और राजनीतिक अधिकारों जैसे गंभीर मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी।
शनिवार को मोरहाबादी में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने दावा किया कि झारखंड राज्य गठन के बाद से यह आदिवासियों का सबसे बड़ा महाजुटान साबित होगा।
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने बताया कि इस महारैली को सफल बनाने के लिए पिछले दो महीनों से राज्यभर में तैयारियां चल रही थीं। इसमें झारखंड के कोने-कोने से लोग शामिल होंगे।
श्री तिर्की ने कहा कि परिसीमन लागू होने पर आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) कम होने का खतरा है। यदि वर्ष 2006-07 की रिपोर्ट के आधार पर परिसीमन लागू किया गया, तो राज्य के मूल निवासियों को भारी नुकसान होगा जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने एमएमडीआर संशोधन बिल को झारखंड के आर्थिक और जल-जंगल-जमीन के हितों के पूरी तरह खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल खारिज करने की मांग की।
श्री तिर्की ने कहा कि रैली के दौरान आदिवासी अधिकारों और राज्य के हितों से जुड़े 5 प्रमुख प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनाई जाएगी।इस आयोजन में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू सहित कई प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक नेता शामिल होंगे।आयोजन समिति की ओर से मुख्यमंत्री को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
बंधु तिर्की ने स्पष्ट किया कि रैली के बाद एक प्रतिनिधिमंडल संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों से मुलाकात करेगा। उन्हें झारखंड की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा ताकि जब भी संसद में परिसीमन या एमएमडीआर बिल का विषय आए, तो झारखंड के आदिवासी और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जोरदार आवाज उठाई जा सके।
प्रेस वार्ता में प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता दयामनी बारला समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
