मनातू के केदल में पुलिस मुठभेड़ में दो जवानों की शहादत का आरोपी है 10 लाख का इनामी शशिकांत
पलामू एसपी कपिल चौधरी की अपील: बचे हुए नक्सली आत्मसमर्पण करें, वरना होगा सफाया
मेदिनीनगर। झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुती कमेटी (टीएसपीसी) के प्रमुख और दुर्दांत माओवादी ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता (उर्फ सरदार/तुषार रंजन/फूलचंद/दुलारचंद) के वाराणसी में उत्तर प्रदेश एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद संगठन का पूरा दारोमदार अब जोनल कमांडर शशिकांत के कंधों पर आ गया है। इस घटनाक्रम के बाद संगठन में शशिकांत का दबदबा काफी बढ़ गया है।
मूल रूप से पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र अंतर्गत केदल गांव का रहने वाला शशिकांत झारखंड सरकार द्वारा 10 लाख रुपये का इनामी नक्सली है। इसके अलावा वह एनआईए के कई मामलों में भी वांटेड है। इसका प्रभाव क्षेत्र पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक फैला हुआ है। वर्ष 2000 के दशक में माओवादी संगठन से जुड़ने के बाद शशिकांत, ब्रजेश गंझू के संपर्क में आया और बाद में टीएसपीसी में शामिल हो गया। वर्तमान में वह अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहता है।
विगत वर्ष सितंबर में करमा पूजा की रात शशिकांत के अपने पैतृक गांव केदल आने की गुप्त सूचना पलामू पुलिस को मिली थी। सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम ने उसके घर की घेराबंदी शुरू की, तो शशिकांत ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई के बावजूद वह अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। इस भीषण मुठभेड़ में हैदरनगर थाना क्षेत्र के दो जांबाज पुलिस जवान—संतन मेहता और सुनील राम शहीद हो गए थे।
इस संबंध में पलामू के पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी ने बताया कि जिले में नक्सली संगठन काफी कमजोर हो चुके हैं और कैडरों की घटती संख्या से वे पस्त पड़ गए हैं। उन्होंने नक्सली संगठन से जुड़े लोगों से अपील की है कि वे सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें और समाजहित में कार्य करें। एसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि जो नक्सली समर्पण नहीं करेंगे, चलाए जा रहे पुलिस छापेमारी अभियान और एनकाउंटर में उनका पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।
