​रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रांची की विशेष पीएमएलए (प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई सुनवाई में उनके खिलाफ आरोप गठित कर दिए हैं। इसके साथ ही मामले में उनके खिलाफ औपचारिक ट्रायल (न्यायिक सुनवाई) शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

​इससे पहले 24 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोप गठन के लिए 30 सितंबर की तिथि तय की थी।

​हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत द्वारा आरोप गठन को टालने की मांग खारिज किए जाने के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, आज हाईकोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को 20 अक्टूबर तक पूरक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह पूरा मामला रांची के बड़गाईं अंचल स्थित करीब 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने आरोप लगाया है कि इस जमीन के मालिकाना हक और दस्तावेजों में हेरफेर कर इसे गैर-कानूनी तरीके से हासिल किया गया, जिसमें हेमंत सोरेन मुख्य आरोपी हैं।

अदालत द्वारा आरोप गठित करने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप न्यायिक रूप से साबित हो गए हैं। इसका तात्पर्य यह है कि अदालत ने मामले को सुनवाई के योग्य पाया है। अब ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान अभियोजन (ईडी) और बचाव पक्ष दोनों ही अदालत के समक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें पेश करेंगे, जिसके आधार पर अंतिम फैसला आएगा।