​जमशेदपुर। झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों के समर्थन में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास उतर आए हैं। मंगलवार को जमशेदपुर परिसदन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम लिखा एक खुला पत्र जारी किया। रघुवर दास ने राज्य सरकार से राजनीति से ऊपर उठकर छात्रों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करने और त्वरित कार्रवाई की अपील की।

​रघुवर दास ने कहा कि यह पत्र किसी राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य की चिंता में लिखा गया है। आंदोलनरत छात्रों की स्थिति देखकर उन्हें 1974 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की याद आती है, जिससे जुड़कर उन्होंने स्वयं अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि छात्र यूँ ही पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर नहीं उतरते; बीते 5-6 वर्षों से लगातार हो रही अनियमितताओं से उनका भरोसा टूट चुका है।

​पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के फैसले का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार छात्रों से संवाद कर सकती है और तुरंत सीबीआई जांच के आदेश दे सकती है, तो झारखंड सरकार जेपीएससी और जेएसएससी की धांधली पर सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है? उन्होंने राज्य पुलिस की सीआईडी के बजाय पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की।

​रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि सरकार तुरंत आंदोलनकारी छात्र प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाए। उन्होंने मांग रखी कि

​परीक्षा में हुई धांधली के दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।​भविष्य की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कड़ा कानून और व्यवस्था लागू की जाए।

​सरकार को आगाह करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा नहीं सुलझाया गया, तो यह विरोध पूरे राज्य में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लेगा, जिसकी पूरी जवाबदेही हेमंत सरकार की होगी।