रांची: बदलती सामाजिक व्यवस्था, पारिवारिक तनाव और रोजगार की अनिश्चितता के कारण झारखंड में मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग, झारखंड के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर दिन औसतन 6 लोग आत्महत्या का प्रयास करते हैं, जबकि हर साल लगभग 2,000 लोग अपनी जान गंवा देते हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार से 16 सितंबर तक दो सप्ताह का 'आत्महत्या रोकथाम सप्ताह' शुरू किया है। इस राज्यव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों और स्वास्थ्य केंद्रों में आत्महत्या को लेकर लोगों की सोच और बातचीत के नजरिए में बदलाव लाना है।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर रांची के सिविल सर्जन सभागार में जागरूकता कार्यक्रम और रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अभियान निदेशक ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है।
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया भर में हर साल 7.20 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। 15 से 29 वर्ष के युवाओं में यह मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। निदेशक ने कहा कि जीवन में हर बात हमारी इच्छा के अनुसार नहीं हो सकती, इसलिए हमें अपनी मानसिकता में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है।
अभियान निदेशक ने बताया कि मानसिक तनाव से जूझ रहे लोग सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य के सभी जिलों में मनोचिकित्सक सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल जारी है। वर्तमान में 13 जिलों में यह व्यवस्था लागू है, जबकि शेष 11 जिलों में जल्द ही मनोचिकित्सक तैनात किए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता और चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.आर. मुस्ताफी ने कहा कि मानसिक तनाव का एक बड़ा कारण अपनी परेशानियों और भावनाओं को दूसरों से न बांटना है। उन्होंने सलाह दी कि व्यक्ति को जिस पर भरोसा हो, उसके साथ अपनी समस्याएं साझा करनी चाहिए ताकि समय रहते भावनात्मक और चिकित्सीय सहयोग मिल सके। अधिकारियों ने सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को भी मानसिक तनाव का एक प्रमुख कारण बताया।
इस अवसर पर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपशिखा, डॉ. वीणा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह और क्षेत्रीय समन्वयक श्वेता वर्मा समेत कई स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
