रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। बुधवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैनर तले राज्यभर से आए 10 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने राजधानी रांची में जोरदार प्रदर्शन किया। मोरहाबादी मैदान से लोक भवन घेराव के लिए निकले इस पैदल मार्च में कुछ कार्यकर्ता ऊंट पर सवार होकर विरोध जताने पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। झामुमो नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' का गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
राज्यसभा सांसद महुआ माझी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से एसआईआर के नाम पर जायज मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं।

विधायक विकास कुमार मुंडा ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि 13 करोड़ से अधिक लोगों को 'बांग्लादेशी' बताकर मतदाता सूची से बाहर करने का दावा किया जा रहा है, जबकि बांग्लादेश की कुल आबादी ही लगभग 11 करोड़ है।
विधायक अमित महतो ने कहा कि संथाल परगना, पूर्वी सिंहभूम और कोयलांचल जैसे क्षेत्रों में बांग्ला भाषी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की।
तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर कथित अंदरूनी मतभेद का मुद्दा उठाया।
प्रदर्शन में पार्टी महासचिव विनोद पांडेय, सुप्रियो भट्टाचार्य और रांची जिलाध्यक्ष मुश्ताक आलम समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। झामुमो नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं लाई गई और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो पूरे राज्य में इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
