रांची। द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए खुलासों के बाद झारखंड के सत्तारूढ़ दलाें ने हल्ला बोल दिया है। राज्य की सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) ने चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के नेताओं ने एक सुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और बर्खास्तगी की मांग करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है।
‘चुनाव आयोग 3 सदस्यों की संस्था, किसी का निजी कार्यालय नहीं’ः झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ऐसे फैसलों पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई, जिनकी उन्हें जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दो चुनाव आयुक्त बार-बार आपत्ति जता रहे हों और फिर भी फैसले थोपे जा रहे हों, तो देश को यह जानने का हक है कि आखिर चुनाव आयोग को चला कौन रहा है?
विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल में एसआईआर की आड़ में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत बर्खास्त करने और सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की।
‘राहुल गांधी द्वारा उठाए गए 'वोट चोरी' के सवाल सच साबित हुए’ः झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जो 'वोट चोरी' के सवाल उठाए थे, वे अब इन खुलासों से पूरी तरह सच साबित हो रहे हैं।
श्री दूबे ने कहा कि अगस्त 2026 में फॉर्म-6 में बदलाव और मई 2026 में आईटी विभाग द्वारा सैकड़ों निर्वाचन निबंधन अधिकारियों के पोर्टल एक्सेस रोके जाने पर दोनों चुनाव आयुक्तों ने गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 38 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से अपील के बाद भारी संख्या में गड़बड़ियां सामने आईं। दूबे ने चेतावनी दी कि यदि मतदाता सूची में हेरफेर जारी रही, तो 2025, 2026 और 2027 में 18 वर्ष पूरे करने वाले नए युवा मतदाताओं का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
ज्ञानेश कुमार को पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं : सीपीआईएम ः मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने जारी बयान में कहा कि तीन सदस्यों वाले आयोग में बहुमत या सर्वसम्मति से निर्णय लेने के कानूनी नियम की अनदेखी कर मुख्य चुनाव आयुक्त ने मनमाने फैसले थोपे हैं। सीपीआई (एम) ने मांग की है किमुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे आरोप बेहद चिंताजनक: राजदः राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग लोकतंत्र का मंदिर है। दो चुनाव आयुक्तों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और विशेष सघन पुनरीक्षण तथा फॉर्म-6 के बदलावों को 'अनधिकृत व गैर-कानूनी' बताना इस बात का प्रमाण है कि स्वायत्त संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव है। राजद ने ज्ञानेश कुमार से तुरंत इस्तीफे की मांग की है।
